Single acting और double acting इंजन में मुख्य अंतर यह है कि पिस्टन के किस तरफ गैस या फ्यूल का दबाव (force) काम कर रहा है । यहाँ इनका सरल विवरण दिया गया है: 1. Single Acting Engine इस इंजन में वर्किंग फ्लुइड (जैसे पेट्रोल, डीजल या गैस) पिस्टन के केवल एक ही तरफ काम करता है। काम करने का तरीका : पावर स्ट्रोक के दौरान फ्यूल का दबाव पिस्टन को एक ही दिशा में धकेलता है। पिस्टन को वापस अपनी पुरानी जगह लाने के लिए गुरुत्वाकर्षण (gravity) , स्प्रिंग , या फ्लाईव्हील (flywheel) की ऊर्जा का इस्तेमाल होता है। उदाहरण : कार, मोटरसाइकिल और लगभग सभी आम गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) सिंगल एक्टिंग होते हैं। 2. Double Acting Engine इसमें वर्किंग फ्लुइड पिस्टन के दोनों तरफ (बारी-बारी से) काम करता है। काम करने का तरीका : इसमें सिलेंडर के दोनों सिरों पर पोर्ट होते हैं। जब पिस्टन नीचे जा रहा होता है, तब एक तरफ से दबाव मिलता है, और जब वह वापस ऊपर आ रहा होता है, तब दूसरी तरफ से भी दबाव दिय...
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